हरिद्वार

Uttarakhand Chamoli Glacier : चमोली में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही, ऋषि गंगा और NTPC प्रोजेक्ट को नुकसान

आज सुबह चमोली में ग्लेशियर टूटने से आसपास काम कर रहे कई मजदूर बह गये, ग्लेशियर टूटने से ऋषि गंगा और NTPC प्रोजेक्ट को हुआ नुकसान. आईटीबीपी के 100 से ज्यादा जवान राहत-बचाव के लिए लगे हुए हैं, 150 से ज्यादा मजदूर लापता होने की खबर है.

सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1070 और 9557444486 जारी किए हैं।

उत्तराखंड में आपदा: चमोली में ग्लेशियर टूटने से धौलीगंगा नदी का जल स्तर बढ़ा, पावर प्रोजेक्ट के 150 मजदूर लापता; यूपी में हाई अलर्ट

उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूट गया। इसके बाद धौलीगंगा नदी में जल स्तर अचानक बढ़ गया। चमोली के तपोवन इलाके में हुई इस घटना से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को काफी नुकसान पहुंचा है। यहां काम करने वाले 150 मजदूर लापता हैं। नदी के किनारे बसे कई घर पानी में बह गए हैं। आसपास के गांवों को खाली कराया जा रहा है। ऋषि गंगा के अलावा एनटीपीसी के भी एक प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचा है। तपोवन बैराज, श्रीनगर डैम और ऋषिकेश डैम भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।उत्तराखंड से आपदा के अपडेटउत्तर प्रदेश में भी हाई अलर्ट। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा किनारे बसे सभी जिलों में नदी के जलस्तर पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए।ITBP के 200 से ज्यादा जवान, SDRF की 10 और NDRF की टीमें रेस्क्यू काम में जुटी हुई हैं। कुछ और टीमें एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर से पहुंच रही हैं। ऋषि गंगा पॉवर प्रोजेक्ट को भी इस आपदा में काफी नुकसान पहुंचा है।

सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1070 और 9557444486 जारी किए हैं।

सरकार ने अपील की है कि इस घटना के बारे में पुराने वीडियो सर्कुलेट कर अफवाह न फैलाएं।हरिद्वार में कुंभ मेला चल रहा है। इसलिए राज्य सरकार ने यहां भी हाई अलर्ट जारी कर दिया है।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनता से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। वो खुद चमोली रवाना हो चुके हैं।एहतियातन भागीरथी नदी का पानी रोक दिया गया है।

जून 2013 में आई आपदा में 4 हजार से ज्यादा की जान गई थी।

16-17 जून 2013 को बादल फटने से रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिलों में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में 4,400 से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए। 4,200 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया। इनमें 991 स्थानीय लोग अलग-अलग जगह पर मारे गए। 11,091 से ज्यादा मवेशी बाढ़ में बह गए या मलबे में दबकर मर गए। ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया। 100 से ज्यादा बड़े व छोटे होटल ध्वस्त हो गए। आपदा में नौ नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए थे।

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Balika Diwas बालिका दिवस पर हरिद्वार उत्तराखंड की सृष्टि बनी एक दिन की मुख्यमंत्री

बालिका दिवस पर हरिद्वार उत्तराखंड की सृष्टि बनी एक दिन की मुख्यमंत्री
हरिद्वार की सृष्टि गोस्वामी को राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी के अवसर पर उत्तराखंड का एक दिन का मुख्यमंत्री बनाया गया है |
हरिद्वार दौलतपुर की रहने वाली सृष्टि बीएमसी की छात्रा हैं | सृष्टि गोस्वामी केपिता की किराने की दुकान है। सृष्टि गोस्वामी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया जाना बालिकाओं को नेत्रित्व क्षमता को प्रोत्साहित करेगा |

Namami Gange गंगा के काले जल के शोर के बीच उत्तराखंड से पानी छोड़े जाने पर निर्मल हुई गंगा जलस्तर बढ़ने से मुसीबत

गंगा के काले जल के शोर के बीच उत्तराखंड से पानी छोड़े जाने पर निर्मल हुई गंगा जलस्तर बढ़ने से मुसीबत
प्रयागराज काले जल के शोर के बीच उत्तराखंड से पानी छोड़ने पर संगम पर गंगा की धारा निर्मल हो गई लेकिन मेला क्षेत्र में संतो भक्तों की मुसीबतें भी बढ़ गई हैं। जलस्तर में तेजी आने से शनिवार को माघ मेला क्षेत्र के कई क्षेत्रों में बिजली के खंभे डूब गए। पान्टून पुलों में कटान तेज हो गई ।पानी रोकने के लिए बालों की बोरियों में बाढ़ बनाई जाती रही लेकिन इंतजाम भी बेअसर दिखाई दिया पहले 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में गिरावट शुरू नहीं हुई तो दिक्कतें बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। माघ मेले में संगम पर काले गंगाजल को लेकर संतों की नाराजगी के बाद भीमगोड़ा और नरोरा बांधों से पानी छोड़ा गयाः। पिछले 2 दिनों के भीतर 3 फीट से अधिक जलस्तर बढ़ने से सेक्टर 4 और सेक्टर 2 में दिक्कतें पैदा होने लगी। सेक्टर 4 में शास्त्री पुल के नीचे पानी रोकने के लिए करीब 20 मीटर लंबी बालू की बोरियों की बाढ़ बनाई गई लेकिन वह जलमग्न हो गई। पानी दूसरे हिस्सों में प्रवेश कर गया सेक्टर 4 के स्नान घाट भी डूब गए ।काली त्रिवेणी के अलावा ओल्ड जीटी और गंगोली शिवाला पांटून पुलों में कटान तेज हो गई काली पांटून पुल के पास बिजली के कई खंभे भी पानी में आ गए हैं ।मेला क्षेत्र का पूर्वी हिस्सा भी बढ़ते जल स्तर से प्रभावित हो रहा है। सिंचाई बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने के लिए बालू की बोरियों की बाड़ दिनभर लगाई जाती रही लेकिन पानी तेज होने से इसका कोई असर नहीं हो रहा है।

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