प्रकृति से ही प्रगति संभव है


यह बात सच प्रतिशत सत्य है की प्रकृति से ही प्रगति संभव है क्योंकि बिना प्रकृति के जीवन यापन संभव नहीं है और जब जीवन ही नहीं होगा तो हम प्रगति का तो सोच ही नहीं सकते
प्रगति होने से वातावरण सुंदर और स्वच्छ रहता है जिससे जीवन जीने का स्तर बढ़ जाता है जब प्रकृति भरपूर थी रोग हमसे दूर भागते थे और हम अपने कार्य की प्रगति में लगे रहते थे
जैसा कि आप सब जानते हैं कि इस समय सभी जंगलों को काटकर कंक्रीट के जंगलों में परिवर्तित किया जा रहा है प्रगति तो हो रही है पर दूसरी तरफ जिसके परिणाम स्वरुप जमकर वायु परिवर्तन हो रहा है तथा तरह-तरह के रोग आ गए हैं और हम सिर्फ विनाश की ओर जा रहे हैं और कहीं नहीं
अंततोगत्वा मैं अपने इस विचार के साथ अपनी वाणी को विराम दूंगा कि हमें सिर्फ और सिर्फ प्रकृति की प्रगति करनी है प्रकृति ही हमारी प्रगति कर देगी मेरे इस उपकयां का सार यही है की प्रकृति से ही प्रगति संभव है
***रविंद्र कुमार गुप्ता पर्यावरण प्रेमी

रविंद्र कुमार गुप्ता, एक पर्यावरण प्रेमी, इस बात पर बल देते हैं कि प्रकृति से ही प्रगति संभव है। उनका मानना है कि प्रकृति के बिना जीवन यापन असंभव है और जब जीवन ही नहीं होगा तो प्रगति की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

प्रकृति के भरपूर होने से वातावरण स्वच्छ रहता है और जीवन स्तर ऊँचा उठता है। पहले जब प्रकृति भरपूर थी, तब रोगों से दूरी बनी रहती थी और लोग अपने कार्यों में प्रगति करते थे।

लेकिन आजकल जंगलों का विनाश हो रहा है और कंक्रीट के जंगल बन रहे हैं। प्रगति तो हो रही है, लेकिन इसके विपरीत वायु प्रदूषण और रोगों में वृद्धि हो रही है।

इसलिए, रविंद्र जी का कहना है कि हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए और उसकी प्रगति करनी चाहिए। प्रकृति हमारी प्रगति का आधार है।

सार:

  • प्रकृति के बिना जीवन और प्रगति असंभव है।
  • प्रकृति के भरपूर होने से वातावरण स्वच्छ रहता है और जीवन स्तर ऊँचा उठता है।
  • जंगलों का विनाश और कंक्रीटीकरण वायु प्रदूषण और रोगों में वृद्धि का कारण बन रहा है।
  • हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए और उसकी प्रगति करनी चाहिए।