हमने चुना है देश,तुम सोचो कि तुमने क्या चुना….

हमने चुना है देश,तुम सोचो कि तुमने क्या चुना….
स्वाभिमानऔर शहीदों की शौर्यगाथा का बखान कर कवियों ने लूटी तालियां ।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में राष्ट्रप्रेम की गूंज के बीच देर शाम तक जमें रहे श्रोता।
करछना। इस देश के दो गीत हैं, एक चुनकर गुनगुना,हमने चुना है देश,तुम सोचो कि तुमने क्या चुना। विजय दिवस के मौके पर स्थानीय करछना में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के दौरान इटावा से आए चर्चित ओजकवि राम भदावर की ऐसी पंक्तियों पर भारत मां के जयकारों से पाण्डाल गूंज उठा। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ मुख्यअतिथि अजय शुक्ला और विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन,माल्यार्पण और रींवा मध्यप्रदेश से आई कवयित्री क्रांति पांण्डेय द्वारा प्रस्तुत वाणीवंदना के साथ हुआ। देश के युवाओं की पसंद गीतकार प्रसिद्ध लेखक,कवि निलोत्पल मृणाल ने शब्द रंगों सेश्रोताओं के बीच राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत की। कवि संतोष शुक्ल समर्थ ने कहा, जब तन मन पर हो चढ़ा देश भक्ति का रंग।जीती जाती है तभी दुनिया की हर जंग।। ओज कवि कनक तिवारी ने,जगत जानता राष्ट्र गौरव हमारा,तो क्या कर सकेंगे ये कौरव हमारा जैसी पंक्तियों से गौरव गाथा को बयां कर खूब तालियां बटोरी तो वहीं युवाओज कवि विपिन सिंह की पंक्तियों पर भी श्रोता रोमांचित हो भारत माता के जयकारे लगाते रहे। हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी और नजर इलाहाबादी ने छंदों मुक्तकों के माध्यम से वर्तमान में व्याप्त राजनैतिक,सामाजिक विकृतियों पर तंज कसते हुए लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर किया। वरिष्ठ गीतकार राजेंद्र शुक्ल ने वासंतीगीत के माध्यम से कार्यक्रम में खूब समां बांधी। डॉ.श्लेश गौतम के दोहों और मुक्तकों में राष्ट्र के प्रति समर्पण भावना की झलक मिली तो वहीं शिवम् भगवती ने राधा कृष्ण प्रेम से जुड़ी पंक्तियों पर खूब तालियां बटोरी। संदीप शुक्ल के बाद जितेंद्र मिश्र जलज कहा,दीप पर जां लुटाता पतंगा रहे,हम रहें ना रहें यह तिरंगा रहे।मंच की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ छंदकार फतेह बहादुर सिंह ऋषि राज ने हल्दीघाटी और राणा के शौर्य का बखान करते हुए अपनी पंक्तियों पर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच का संचालन कर रहे अशोक बेशरम ने कहा देश प्रेम प्याला पिये,बने मतवाला आला,अंग में बसंती बेस देश के जवान की। जानकी के देश में ना जाने कई जान गईं, जननी के जान बाजी दिए निज जानकी।। इसके पूर्व लोक गायिका मोहिनी श्रीवास्तव और मिश्र बंधुओं ने देश गीत और मंगल गीत प्रस्तुत करते हुए लोगों को भाव विभोर किया। मुख्य अतिथि द्वारा कार्यक्रम की सराहना की गई तो वही विशिष्ट अतिथि डॉक्टर भगवत पांडेय ने साहित्य दीप जलाए रखने के लिए करछना के युवाओं को बधाई दी। मंच पर आयोजन समिति ने सभी कलमकारों को प्रतीक चिन्ह और शाल प्रदान कर सम्मानित करते हुए सभी के प्रति स्वागत आभार प्रकट किया।इस मौके पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य त्रिवेणी प्रसाद पांण्डेय,सेवालाल,जीपी सिंह,पटेल,डॉ.पप्पू यादव,जीतेन्द्र तिवारी,चिंतामणि शुक्ल,हंसराज सिंह,अभिषेक सिंह,प्रिंस सिंह,विन्देश्वरी प्रसाद मिश्र,मदन मोहन शंखधर,केपी तिवारी,विष्णु शुक्ला,इन्द्रप्रताप सिंह,अमर बहादुर सिंह,डी आर सिंह,डॉ.दिनेश सोनी,रंगराज सिंह,डॉ.वाई पी सिंह,चन्द्रवीर, जी.पी.सिंह,सिद्धनाथ सिंह,दीपू सिंह,वेदश्रीवास्तव,राजेश शुक्ला लाल दिवाकर सिंह,रिंकू सिंह,राजू सिंह,राजकुमार मिश्रा,कुलदीप मिश्रा,आनंद तिवारी नागेंद्र सिंह,अमन मिश्रा,सहितक्षेत्रीय गणमान्य जन,काव्य प्रेमी और बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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