वर्तमान भाद्रपद मास का शुक्ल पक्ष केवल 13 दिन का, ऐसा संयोग द्वापर युग के महाभारत काल में था……!!!

वर्तमान भाद्रपद मास का शुक्ल पक्ष केवल 13 दिन का, ऐसा संयोग द्वापर युग के महाभारत काल में था……!!!

वर्तमान भाद्रपद मास का शुक्ल पक्ष केवल 13 दिन का, ऐसा संयोग द्वापर युग के महाभारत काल में था……!!!!!
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भाद्रपद ( भादों) मास 23 अगस्त से शुरू है और 20 सितंबर तक चलेगा
हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल संवत् 2078 में सदियों बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष यानी भादो शुक्ल पक्ष केवल 13 दिन का पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे दुर्योंग काल माना जा रहा है। ऐसा संयोग महाभारत काल में पड़ा था। इस साल दुर्योग काल के चलते प्रकृति का प्रकोप बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
विक्रम संवत् का प्रत्येक महीना दो पखवाड़ा यानी-15-15 दिनों का होता है। इसे कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष कहा जाता है। जब किसी पक्ष में एक तिथि दो दिन पड़ती है तो यह पक्ष 16 दिनों का हो जाता है और तिथि के घटने पर 14 दिनों का होता है।
इस साल विक्रम संवत 2078 में भाद्रपद महीने का कृष्ण पक्ष 23 अगस्त से शुरू होकर 7 सितंबर तक चला अर्थात् कृष्ण पक्ष 16 दिनों का रहा। अब शुक्ल पक्ष 8 सितंबर से शुरू हुआ है जो 20 सितंबर तक चलेगा। इस शुक्ल पक्ष में दो तिथियों प्रतिपदा और त्रयोदशी का क्षय हो रहा है, इसलिए यह शुक्ल पक्ष केवल 13 दिनों का होगा। ऐसा संयोग हजारों सालों में आता है। ,इसे “विश्वघस्र” पक्ष कहते हैं। यह बहुत बड़ा दुर्योग है, हजारों वर्ष बाद ऐसा दुर्योग आता है। महाभारत युद्ध के पहले 13 दिन के पक्ष का दुर्योग काल आया था। उस समय बड़ी जन-धन हानि हुई थी। घनघोर युद्ध हुआ था।

पक्षस्य मध्ये द्वितिथि पतेतां यदा भवेद्रौरव काल योगः।
पक्षे विनष्टं सकलं विनष्टमित्याहुराचार्यवराः समस्ताः।।
अर्थात् – पक्ष के मध्य में यदि दो तिथियों की हानि होती है तो यह “रौरव काल” संज्ञक दुर्योग होता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे अच्छा नहीं माना गया है। ऐसा दुर्योग होने से अतिवृष्टि, अनावृष्टि, राजसत्ता का परिवर्तन, विप्लव, वर्ग भेद आदि उपद्रव होने की संभावना पूरे साल बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि-

त्रयोदशदिने पक्षे तदा संहरते जगत्।
अपिवर्षसहस्रेण कालयोगः प्रकीर्तितः।।

अर्थात् – समस्त प्रकृति को पीड़ित करने वाला यह दुर्योग संक्रामक रोगों की भी वृद्धि कर सकता है। इस पक्ष में मांगलिक कार्य, व्रतारम्भ, उद्यापन, भूमि भवन का क्रय विक्रय, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्यों का त्याग कर देना चाहिए।
काल चक्र की गणना भारी।
जाने मुरारी या त्रिपुरारी।।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871

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