इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा को मिला 50 लाख का पैकेज, दिग्गज कंपनी ने दी ये जिम्मेदारी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा को मिला 50 लाख का पैकेज, दिग्गज कंपनी ने दी ये जिम्मेदारी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा को मिला 50 लाख का पैकेज, दिग्गज कंपनी ने दी ये जिम्मेदारी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की शोध छात्रा ऋतंभरा को दुबई के जी-42 हेल्थ सेंटर से 50 लाख रुपये का पैकेज मिला है। उन्हें यह पैकेज जिस लिए मिला है वह भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। दरअसल, ऋतंभरा एक जीनोमिक्स हैं, जो दुबई के हेल्थ सेंटर में कैंसर के रोकथाम और इलाज पर काम करेंगी। जीनोमिक्स क्या है, ऋतंभरा के गुरु और इविवि में बायोकेमेस्ट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुनीश पांडेय बताते हैं कि जीनोमिक्स एक व्यक्ति के सभी जीन (जीनोम) का अध्ययन है, जिसमें एक दूसरे के साथ और व्यक्ति के पर्यावरण के साथ जीनों का संबंध शामिल है।
जीनोमिक्स और संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण स्वास्थ्य देखभाल को बदल रहा है और हमें कैंसर जैसी जटिल बीमारियों, भविष्य की दवा और व्यक्तिगत दवा को समझने का अवसर दे रहा है। यूएई सरकार ने हेल्थ सेंटर को सर्वे कर लोगों को इस बात के लिए आगाह करने का प्रोजेक्ट सौंपा है कि पर्यावरण के किस तत्व से, किस जीनोमिक वाले व्यक्ति को कौन सा कैंसर हो सकता है। इसके लिए कौन सी दवा का उपयोग की जाए जो साइड इफेक्ट न पैदा करे। ऋतंभरा वहां के लोगों का अनुवांशिकीय डेटा तैयार कर उनके लिए कैंसर की उपयोगी दवाएं बनाने की दिशा में काम करेंगी।
इविवि से एमएससी फिर की पीएचडी
डॉ. मुनीश ने बताया कि आजमगढ़ की रहने वाली ऋतंभरा ने इविवि के बायो केमेस्ट्री से एमएससी किया फिर यहीं से पीएचडी की उपाधि हासिल की। उनका रिसर्च जीनोमिक्स पर है। जी-42 हेल्थ सेंटर में उनका चयन पिछले माह प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर 50 लाख रुपए वार्षिक पैकेज पर हुआ है। ऋतंभरा ने डॉ. मुनीश पांडेय के निर्देशन में अपना शोध कार्य पूरा किया है। डॉ. मुनीश ने बताया कि गंभीर मर्ज के इलाज में जीनोम एक कारगर प्लेटफार्म बन रहा है। जीनोमिक्स इस कड़ी में एक नया आयाम बन रहा है। इंसान के जीन (जीनोम) का अध्ययन और पर्यावरण के साथ उन जीनों के संबंध का विश्लेषण एक अहम कड़ी है।

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