क्या है विहंगम योग

क्या है विहंगम योग
स्रोत – अध्यात्म-विज्ञान पुस्तक से। संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की अमृतमयी दिव्यवाणीयों का अनूठा संग्रह।

  1. मनोनिग्रह से शुरू होकर मोक्ष तक की यात्राक् हैविहंगम योग।
  2. ज्ञान का वास्तविक स्वरूप है विहंगम योग।
  3. मन के नियंत्रण का विज्ञान हैं विहंगम योग।
  4. ध्यान की पूर्णता है विहंगम योग।
  5. दुःखो के बीच सुखपूर्वक जीवन जीने की कला है विहंगम योग।
  6. न केवल जीवन जीने की कला बल्कि शरीर छोड़ने की कला, मृत्यु का विज्ञान है विहंगम योग।
  7. मुक्ति का विज्ञान है विहंगम योग।
  8. Science of Consciousness, चेतना का विज्ञान है विहंगम योग।
  9. स्वर्वेद का सिद्धान्त, स्वर्वेद का दर्शन है विहंगम योग।
  10. सदगुरु का अनुभव है विहंगम योग।
  11. सिद्धान्त और साधना का समन्वय है विहंगम योग।
  12. योग की पूर्णता है विहंगम योग।
  13. आत्मा के उद्धार का साधन है विहंगम योग।
  14. स्वयं को पहचानने की विद्या है विहंगम योग।
  15. परमात्मा की शक्ति से जुडने की कला हैविहंगम योग।
  16. धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति का साधन है विहंगम योग।
  17. सेवा सत्संग और साधना की त्रिवेणी है विहंगम योग।
  18. ज्ञान का चेतन स्वरूप है विहंगम योग।
  19. भक्ति की चेतन युक्ति, भक्ति की चेतन मार्ग हैविहंगम योग।
  20. भारत की प्राचीनतम् विद्या का नाम हैविहंगम योग।
  21. भक्ति का विशुद्ध स्वरूप है विहंगम योग।
  22. प्रेम की पराकाष्ठा का नाम है विहंगम योग।
  23. प्रेम और श्रद्धा का वास्तविक स्वरूप हैविहंगम योग।
  24. ध्यान की पराकाष्ठा है विहंगम योग।
  25. मन को उसकी भूमि में लय करने का विज्ञान हैविहंगम योग।
  26. स्व में अर्थात आत्मतत्व में स्थित होने का विज्ञान है विहंगम योग।
  27. ज्ञान की उच्चतम भूमि, ज्ञान का चेतन स्वरूप है विहंगम योग।
  28. जिस प्रकार भौतिक विज्ञान के द्वारा भौतिक समस्त पदार्थो का ज्ञान होता है, उसी प्रकार ब्रह्म-विद्या विहंगम योग के इस चेतन विज्ञान के द्वारा समस्त चेतन पदार्थो का ज्ञान प्राप्त होता है।
  29. चेतन आत्मा एवं चेतन परमात्मा की विज्ञान की प्राप्ति का मार्ग है विहंगम योग।
  30. अध्यात्म का विज्ञान है विहंगम योग।
  31. सदगुरु का सिद्धान्त हैं विहंगम योग।
  32. योग की पराकाष्ठा है विहंगम योग।
  33. स्वर्वेद का चेतन प्रकाश है विहंगम योग।
  34. दशम द्वार को खोलने का विज्ञान हैविहंगम योग।
  35. दस और दो का भेद है विहंगम योग।
  36. प्रकृति से परे होने की विद्या है विहंगम योग।
  37. इन्द्रियों से परे पदार्थो की अनुभव का विज्ञान है विहंगम योग।
  38. शरीर में रहते हुए, संसार में रहते हुए इनसे परे होने का विज्ञान है विहंगम योग।
  39. आत्मा की ध्वनि को सुनने का विज्ञान हैविहंगम योग।
  40. ज्ञान की सर्वोच्च भूमि है विहंगम योग।
  41. प्रत्येक वस्तुओं का वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है विहंगम योग।
  42. विहंगम योग क्या है? यह शब्द-सुरति योग है, यह ब्रह्म-विद्या है, यह मीन मार्ग है, यह सहज योग है, यह पराविद्या है, यह देवयान पथ है, यह चेतन योग है।
  43. भक्ति की पूर्णता है विहंगम योग।
  44. भक्ति का वास्तविक स्वरूप है विहंगम योग।
  45. प्रेम की गहराई, प्रेम की पूर्णता प्रेम की पराकाष्ठा, प्रेम का वास्तविक स्वरूप है विहंगम योग।
  46. साधना का अनुभव है विहंगम योग।
  47. मन, वचन, कर्म से एकता का सिद्धान्त हैविहंगम योग।
  48. आत्मा के कल्याण का साधन है विहंगम योग।
  49. जीवनमुक्ति का विज्ञान है विहंगम योग।
  50. जीते जी परमात्मा की प्राप्ति एवं त्रयताप दुःख से निवृत्ति का साधन है विहंगम योग।
  51. विरह और वैराग्य का मार्ग, विरह और वैराग्य की उच्च भूमि का नाम है विहंगम योग।
  52. विवेक का यथार्थ प्रकाश है विहंगम योग।
  53. भक्ति का यथार्थ प्रकाश है विहंगम योग।
  54. अध्यात्म की आत्मा का नाम है विहंगम योग।
  55. प्रकृति के त्रयगुणों से उपरम होने का साधन हैविहंगम योग।
  56. प्रेम का प्रवाह है विहंगम योग।
  57. अन्तरात्मा में प्रेम रस की धारा को प्रवाहित करने का विज्ञान है विहंगम योग।
  58. आत्मा की भूख को, आत्मा की प्यास को मिटाती है विहंगम योग।
  59. ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का संगम है विहंगम योग।
  60. अध्यात्म का शुद्ध प्रवाह है विहंगम योग।
  61. भारतीय संस्कृति का प्रवाह है विहंगम योग।
  62. वाणी का विषय नहीं बल्कि अनुभव का विषय, साधना का विषय है विहंगम योग।वाणी से जो कुछ भी हम कहेंगे वह अल्प होगा।
  63. अध्यात्म की गाथा है विहंगम योग।
  64. ऋषियों का दर्शन है विहंगम योग।
  65. आत्मा के साक्षात्कार का विज्ञान है विहंगम योग।
  66. श्रद्धा का वास्तविक स्वरूप है विहंगम योग।
  67. विहंगम योग के दो भेद है- एक समस्त वाह्य तत्वों का ज्ञान एवं अभ्यान्तर साधना प्रणाली हैं।
  68. विहंगम योग क्या है? एक सैद्धान्तिक पक्ष और दूसरा साधनात्मक पक्ष है। एक परोक्ष ज्ञान है और एक अपरोक्ष ज्ञान है।
  69. योग, भक्ति एवं उपासना का यथार्थ स्वरूप, वास्तविक स्वरूप हैं विहंगम योग।
  70. सत्य का दर्शन, ईश्वर के साक्षात्कार का विज्ञान है विहंगम योग।

एक परिभाषा नहीं है अनन्त – अनन्त परिभाषायें हैं। न इति, न इति कहने में भलाई हैं।

ईश्वर हैं ! मिलाउँगा !! जिज्ञासु बनें !!!

स्रोत – अध्यात्म-विज्ञान पुस्तक से। संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की अमृतमयी दिव्यवाणीयों का अनूठा संग्रह।

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