सिंह सभा गुरुद्वारे में श्री गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस मनाया गया :

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बाजपुर सिंह सभा गुरुद्वारा में शहीदों के सरताज श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धा पूर्वक मनाया गया । सिक्खों के पांचवे गुरु श्री अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस पर अखंड पाठ कर रागी जत्थे ने संगत को कथा कीर्तन गुरुवाणी से निहाल किया। इस दौरान गुरु का लंगर भी चलाया गया और जगह जगह छबील लगाया। रागी जत्था के भाई दर्शन सिंह ने बताया कि श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर रागी जत्थे ने शबद कीर्तन किया अखंड पाठ का भोग पड़ा है। जगह-जगह छबील भी लगाया गया है। उन्होंने बताया कि आज दूर दूर से संगत आई है। संगत ने गुरु चरणों मे सेवा कर शबद कीर्तन श्रवण करके गुरुघर की सेवा प्राप्त की है।

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  गुरु अर्जुन देव जी सिक्खों के 5वे गुरु थे । गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवम् शांतिपुंज हैं। जगत में गुरुजी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है । उन्हें ब्रह्मज्ञानी भी कहा जाता है। गुरुग्रंथ साहिब में तीस रागों में गुरु जी की वाणी संकलित है । गणना की दृष्टी सेश्री गुरुग्रंथ साहिब में सर्वाधिक वाणी पचवे गुरु की ही है । गुरुग्रंथ साहिब में 36 महान वाणिकारो की वाणियां बिना किसी भेद भाव के संकलित हुई । यह गुरुजी की ही सूझ बूझ का ही परिणाम है । सुखमनी साहिब गुरू जी की अमर वाणी है । करोड़ों प्राणी रोजाना सुबह: को सुखमनी साहिब का पाठ कर शांति प्राप्त करते है ।

गुरु जी के शहीदी पर्व पर उन्हें याद करने का अर्थ है, उस धर्म- निरपेक्ष विचारधारा को मान्यता देना, जिसका समर्थन गुरु जी ने आत्म-बलिदान देकर किया था। उन्होंने संदेश दिया था कि महान जीवन मूल्यों के लिए आत्म-बलिदान देने को सदैव तैयार रहना चाहिए, तभी कौम और राष्ट्र अपने गौरव के साथ जीवंत रह सकते हैं।

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