सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई।

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई।

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की बैठक की प्रेस विज्ञप्ति :-

सी पी आई (एम) पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की बैठक 29 मई को सम्पन्न हुयी, बिमान बसु ने बैठक की अध्यक्षता की, वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में 46 राज्य कमेटी के सदस्यों ने शिरकत की, बैठक में विधानसभा चुनाव की प्राथमिक समीक्षा की गयी, जिलों की तरफ से प्राथमिक समीक्षा पेश की गयी, निर्णय लिया गया कि बूथ और ब्रांच स्तर तक समाज के सभी हिस्से के लोगों की राय लेने के बाद समीक्षा का निष्कर्ष निकाला जाएगा. विपर्यय से सबक लेकर नये जोश के साथ कार्यक्रम लेकर जनता के रोजी – रोटी के प्रश्नों पर आंदोलन संगठित करना होगा ।
प्राथमिक समीक्षा में देखा गया कि वामपंथियों और संयुक्त मोर्चा का परिणाम शोचनीय हुआ है, 2016 में वाममोर्चा ने जिन 32 सीटों पर जीत हासिल की थी, उनमें से 9 सीटों पर भाजपा जीती है, 23 सीटों पर तृणमूल, भाजपा को को जो 77 सीटें मिली हैं, उनमें से पिछली बार 47 सीटों पर तृणमूल जीती थी. तृणमूल पिछली बार की 209 सीटों में से 160 सीटों पर जीत हासिल की थी उसकी सफलता मुख्यतः वाममोर्चा की जीती 52सीटों पर जीत हासिल करने से हुयी है, सी पी आई (एम) ने जिन 138 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उसमें से 94 सीटों पर 2019 की तुलना में वोट बढ़े हैं.
प्राथमिक तौर पर यह देखा गया कि दो दलीय राजनीति को मजबूत करने की प्रक्रिया के बीच चुनाव घोषणा के समय तृणमूल कांग्रेस विरोधी अर्थात सत्ता विरोधी मानसिकता थी. लेकिन भाजपा के तेज हमलावर प्रचार के कारण भाजपा विरोधी मानसिकता बनी, भाजपा के इस हमलावर प्रचार के बीच तृणमूल के वोट लूटने, भ्रष्टाचार, सब जगहों पर व्याप्त अराजकता, लोकतंत्रहीनता लोगों के बीच चुनाव का मुद्दा नहीं बन सके. जनता ने तृणमूल कांग्रेस को भाजपा विरोधी ताकत के रूप में चुन लिया. इसके साथ ही विभिन्न लाभजनक योजनाओं से तृणमूल कांग्रेस जनता का समर्थन पाने में सफल हुयी है । तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच तेज ध्रुवीकरण हो गया, चुनाव परिणाम का सम्भवतः यही मूल कारण है ।
नीति, आदर्श, लोकतंत्र, रोजी -रोटी जैसे मुद्दे पीछे चले गये, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को इस परिणाम का मुख्य कारण मानना, भूल होगी. परिचिति सत्ता की राजनीति को तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही व्यवहार किया है, उसका मुकाबला करना संभव नहीं हो सका. भाजपा के हमलावर प्रचार के कारण बंगाल और बंगाली की स्वतंत्रताबोध ने भी एक उपादान की तरह काम किया है.
प्राथमिक समीक्षा में कहा गया है कि वाममोर्चा की विपत्ति का मूल कारण राजनीतिक और सांगठनिक है. संयुक्त मोर्चा के बारे में जनता के बीच आस्था नहीं बन सकी. हमारे राजनीतिक प्रचार का जनता पर प्रभाव नहीं पड़ा. वैकल्पिक सरकार बनाने का नारा सफल नहीं हुआ. पार्टी की परिधि के बाहर विशाल जनता के साथ वाम शक्तियों की दूरी बढ़ रही है. राजनैतिक विचार पहुँचाने के मामले में सांगठनिक कार्यकलाप में महत्वपूर्ण कमी देखी गयी है ।
राज्य कमेटी की बैठक में कहा गया है कि प्राथमिक समीक्षा को संपूर्ण समीक्षा का रूप देने के लिए बूथ और ब्रांच स्तर पर बहस और राय लेनी होगी. ब्रांच से जिला कमेटी की नियमित कार्य प्रणाली को सुनिश्चित करना होगा. सभी जनसंगठनों की कार्यप्रणाली को नये जोश के साथ परिचालित करना होगा. जन संगठनों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली और संयुक्त आंदोलन को प्रसारित करना होगा. रेड वालंटियर्स के काम ने पार्टी और वामपंथियों की छवि को नये स्तर पर विकसित किया है .इससे सबक लेकर जनसंगठनों को परिस्थिति के अनुसार कार्यक्रम लेने होंगे. रेड वालंटियर के कामों को जारी रखने में मदद करनी होगी. कोविड आक्रांत लोगों के पास खड़ा होना होगा । सबको मुफ्त वैक्सीन ओर आर्थिक रूप से गरीब लोगों के लिए भोजन सामग्री और आर्थिक सहयोग की मांग पर प्रचार आंदोलन के जरिए लोगों तक पहुँचाना होगा, उनके राहत और मुआवजे की मांग पेश करनी होगी ।

कोलकाता, 30 मई,2021

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